Photo Gallery - Independence Day Celebration 2023
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भारतीय स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर गुरुदेव ब्रहमानन्द सरस्वती आश्रम भोपाल में ब्रह्मचारी गिरीश जी ने ध्वजारोहण किया. इस उत्सव में महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ के 250 से अधिक वैदिक पंडित, आचार्य, विद्यार्थी एवं कार्यकर्ता सम्मिलित हुए. ब्रह्मचारी गिरीश जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि “हम सबको अत्यंत गर्व है की हम वेदभूमि– देवभूमि– पूर्णभूमि– पुण्यभूमि के स्वतंत्र भारतवर्ष में जन्मे हैं. हमारे पूर्वजों ने भारत को स्वतंत्र कराकर हमें सौंप दिया है. अब हमारा कर्त्तव्य है कि हम भारत माता की रक्षा करें, भारत के समस्त नागरिकों की रक्षा करें, उन्हें जीवन के पूर्ण विकास का वैदिक मंत्र दें. “हमारा वैदिक ज्ञान, वैदिक विज्ञान, वैदिक परम्पराएं जीवन की पूर्णता का आधार हैं. आवश्यकता है कि हम इस ज्ञान को भारत के प्रत्येक नागरिक तक पहुचायें. ज्ञान शक्ति क्रिया शक्ति का आधार है. ज्ञान चेतना में, आत्मा में निहित है और महर्षि महेश योगी जी ने सम्पूर्ण विश्व को चेतना जगाने का सरलतम विधान प्रदान किया है. चेतना जगाकर हम ज्ञानशक्ति का जागरण कर सकने की सामर्थ्य रखते हैं और पूर्ण क्रिया शक्ति का जागरण कर सकते हैं. अभी स्वतंत्रता को केवल राजनितिक स्वतंत्रता समझा जाता है. वास्तव में स्वतंत्रता तो स्व का तंत्र है. स्व का राज्य है, रामराज्य है, अथवेदानुशासनम है, अथ योगानुशासनम है. यह सन्देश और यह तकनीक हमें सभी नागरिकों तक पहुचानी हैं. योग और यज्ञ की तकनीक भारतीय विकास के मूल में है. आप सब वैदिक इसके विशेषज्ञ हैं. आइये भारतवर्ष और भारत के माध्यम से समस्त विश्व परिवार के लिए आज हम पुनः संकल्प लें कि हमारी वैदिक गुरु परंपरा का "सर्वेभवन्तुसुखिनः" का संकप हम अतिशीघ्र फलित करेंगे.” इस अवसर पैर वैदिक पंडितों ने वेद पाठ भी किया और मिष्ठान वितरण से कार्यक्रम पूर्ण हुआ.
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भारतीय स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर ...
भारतीय स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर गुरुदेव ब्रहमानन्द सरस्वती आश्रम भोपाल में ब्रह्मचारी गिरीश जी ने ध्वजारोहण किया. इस उत्सव में महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ के 250 से अधिक वैदिक पंडित, आचार्य, विद्यार्थी एवं कार्यकर्ता सम्मिलित हुए. ब्रह्मचारी गिरीश जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि “हम सबको अत्यंत गर्व है की हम वेदभूमि– देवभूमि– पूर्णभूमि– पुण्यभूमि के स्वतंत्र भारतवर्ष में जन्मे हैं. हमारे पूर्वजों ने भारत को स्वतंत्र कराकर हमें सौंप दिया है. अब हमारा कर्त्तव्य है कि हम भारत माता की रक्षा करें, भारत के समस्त नागरिकों की रक्षा करें, उन्हें जीवन के पूर्ण विकास का वैदिक मंत्र दें. “हमारा वैदिक ज्ञान, वैदिक विज्ञान, वैदिक परम्पराएं जीवन की पूर्णता का आधार हैं. आवश्यकता है कि हम इस ज्ञान को भारत के प्रत्येक नागरिक तक पहुचायें. ज्ञान शक्ति क्रिया शक्ति का आधार है. ज्ञान चेतना में, आत्मा में निहित है और महर्षि महेश योगी जी ने सम्पूर्ण विश्व को चेतना जगाने का सरलतम विधान प्रदान किया है. चेतना जगाकर हम ज्ञानशक्ति का जागरण कर सकने की सामर्थ्य रखते हैं और पूर्ण क्रिया शक्ति का जागरण कर सकते हैं. अभी स्वतंत्रता को केवल राजनितिक स्वतंत्रता समझा जाता है. वास्तव में स्वतंत्रता तो स्व का तंत्र है. स्व का राज्य है, रामराज्य है, अथवेदानुशासनम है, अथ योगानुशासनम है. यह सन्देश और यह तकनीक हमें सभी नागरिकों तक पहुचानी हैं. योग और यज्ञ की तकनीक भारतीय विकास के मूल में है. आप सब वैदिक इसके विशेषज्ञ हैं. आइये भारतवर्ष और भारत के माध्यम से समस्त विश्व परिवार के लिए आज हम पुनः संकल्प लें कि हमारी वैदिक गुरु परंपरा का "सर्वेभवन्तुसुखिनः" का संकप हम अतिशीघ्र फलित करेंगे.” इस अवसर पैर वैदिक पंडितों ने वेद पाठ भी किया और मिष्ठान वितरण से कार्यक्रम पूर्ण हुआ.
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